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BJP को मिल सकता है दो-तिहाई बहुमत — TMC और AAP के सांसदों का दलबदल

BJP को मिल सकता है दो-तिहाई बहुमत" / "TMC और AAP के सांसदों का दलबदल

BJP दो-तिहाई बहुमत 2026 की तरफ तेजी से बढ़ती दिख रही है। भारतीय राजनीति में इन दिनों दलबदल का दौर चल रहा है। पिछले तीन महीनों में कई विपक्षी सांसद BJP की अगुवाई वाले NDA में शामिल हो चुके हैं…

BJP को मिल सकता है दो-तिहाई बहुमत — TMC और AAP के सांसदों का दलबदल

भारतीय राजनीति में इन दिनों दलबदल का दौर चल रहा है। पिछले तीन महीनों में कई विपक्षी सांसद BJP की अगुवाई वाले NDA में शामिल हो चुके हैं। AAP के 10 में से 7 राज्यसभा सांसद BJP में शामिल हो गए हैं। इसके अलावा TMC के 20 लोकसभा सांसद एक अलग दल बनाकर NDA के साथ आ गए हैं। शिवसेना-UBT के भी 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में जाने की खबर है।

कितनी दूर है दो-तिहाई बहुमत?

लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों की जरूरत है। फिलहाल NDA के पास करीब 350 सांसद हैं जो इस जादुई आंकड़े से सिर्फ 10 कम हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मानसून सत्र तक BJP इस आंकड़े को पार कर सकती है। DMK के कुछ सांसदों के भी NDA की तरफ झुकाव की खबरें हैं।

विपक्ष ने लगाई दलबदल की याचिका

AAP के संजय सिंह और TMC के अभिषेक बनर्जी ने राज्यसभा अध्यक्ष के पास दलबदल विरोधी कानून के तहत याचिका दाखिल की है। लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं आया है। विपक्ष का आरोप है कि सत्ता पक्ष दलबदल को प्रोत्साहन देकर लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है।

दो-तिहाई बहुमत से क्या होगा?

अगर BJP को दो-तिहाई बहुमत मिल जाता है तो वह परिसीमन बिल, महिला आरक्षण बिल और “एक देश एक चुनाव” बिल जैसे संवैधानिक संशोधन आसानी से पारित कर सकती है। यह भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा।

आगे की चुनौतियां

हालांकि दलबदल के बावजूद BJP के लिए दो-तिहाई बहुमत हासिल करना इतना आसान नहीं होगा। संविधान संशोधन बिल पास कराने के लिए न सिर्फ लोकसभा बल्कि राज्यसभा में भी दो-तिहाई समर्थन चाहिए होगा, जहां NDA की स्थिति लोकसभा जितनी मजबूत नहीं है। इसके अलावा दलबदल विरोधी कानून से जुड़ी याचिकाओं पर स्पीकर और राज्यसभा सभापति का फैसला भी अहम भूमिका निभाएगा।

विपक्षी दलों का कहना है कि अगर सांसदों को अयोग्य घोषित किया जाता है, तो BJP का यह गणित बिगड़ सकता है। दूसरी ओर सत्ता पक्ष का दावा है कि यह विलय पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हुआ है।

निष्कर्ष

आने वाले मानसून सत्र में यह साफ हो जाएगा कि BJP अपने बलबूते दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा छू पाती है या नहीं। यह सिर्फ एक राजनीतिक जीत नहीं, बल्कि आने वाले कई बड़े संवैधानिक बदलावों की राह भी खोल सकता है।

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