नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटा: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को होने वाले उपचुनाव से पहले ही भारतीय जनता पार्टी के भीतर जबरदस्त सियासी हलचल मच गई है। पार्टी ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर पूर्व संभागीय संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है। इस फैसले के सामने आते ही मिश्रा समर्थकों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा।
कैसे शुरू हुआ उपचुनाव
दतिया सीट खाली होने की वजह खुद कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती से जुड़ी है। एक सहकारी बैंक धोखाधड़ी के पुराने मामले में दिल्ली की एक अदालत ने भारती को 3 साल की सजा सुनाई, जिसके बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता स्वतः रद्द हो गई। गौरतलब है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में राजेंद्र भारती ने ही नरोत्तम मिश्रा को करीब 7,700 वोटों के अंतर से हराया था, जबकि इससे पहले मिश्रा लगातार तीन बार यहां से जीतते आए थे।
टिकट कटने के बाद कैसे भड़का विरोध
उम्मीदवार की घोषणा होते ही दतिया में विरोध की आग भड़क उठी। समर्थकों ने नेशनल हाईवे-44 को करीब 11 घंटे तक पूरी तरह जाम कर दिया, जिससे आसपास के चार जिलों में आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ। शहर में कई जगह दुकानें बंद करवाई गईं, टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन हुआ और कुछ इलाकों में प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़प भी हुई, जिसमें पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए हल्का बल इस्तेमाल करना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा झटका पार्टी संगठन को तब लगा, जब भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा समेत जिला कार्यकारिणी के कई पदाधिकारियों और पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया।
प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं का कहना था कि नरोत्तम मिश्रा बीते 15 वर्षों से दतिया के विकास से जुड़े रहे हैं और पिछले तीन वर्षों से इसी उपचुनाव की तैयारी में जुटे थे, जबकि आशुतोष तिवारी को स्थानीय जनता और जमीनी कार्यकर्ता ठीक से जानते तक नहीं।
आशुतोष तिवारी कौन हैं
आशुतोष तिवारी दतिया के ही मूल निवासी हैं और भाजपा के पुराने, जमीनी कार्यकर्ता माने जाते हैं। वे शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्रित्व काल में मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं और उनकी पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़ी बताई जाती है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, 2023 की हार के बाद हुए जमीनी सर्वे और फीडबैक के आधार पर ही यह बदलाव किया गया है।
नरोत्तम मिश्रा और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया
खुद नरोत्तम मिश्रा ने सामने आकर अपने समर्थकों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि पार्टी का फैसला सर्वोपरि है, और अगर किसी को कोई आपत्ति है तो उसे पार्टी फोरम के भीतर ही सही तरीके से रखा जाना चाहिए, सड़कों पर विरोध प्रदर्शन का यह तरीका उचित नहीं है।
वहीं मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भरोसा जताया कि आशुतोष तिवारी भारी मतों से यह उपचुनाव जीतेंगे, और कहा कि पार्टी हर फैसला सोच-समझकर लेती है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी सीट पर टिकट को लेकर कई दावेदारों का होना कोई नई बात नहीं है, और उन्हें भरोसा है कि नरोत्तम मिश्रा खुद भी पार्टी के लिए सक्रिय रूप से काम करेंगे।
कांग्रेस के लिए बना अवसर
भाजपा के भीतर मचे इस घमासान को कांग्रेस खेमा अपने लिए एक बड़े राजनीतिक अवसर के तौर पर देख रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि इस आंतरिक कलह से दतिया की चुनावी लड़ाई उसके लिए अपेक्षाकृत आसान हो सकती है। हालांकि कांग्रेस ने अभी अपने उम्मीदवार का औपचारिक ऐलान नहीं किया है। पार्टी पहले राजेंद्र भारती की पत्नी या बेटे को टिकट देने पर विचार कर रही थी, लेकिन दोनों ने ही चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया, जिसके बाद अब कई नए नामों पर चर्चा चल रही है।
आगे क्या होगा
राजनीतिक हलकों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नाराज जिला संगठन के दबाव में आकर भाजपा आलाकमान अपना फैसला बदलेगा, या मिश्रा समर्थकों को मनाने की जिम्मेदारी खुद नरोत्तम मिश्रा को निभानी होगी। यह भी देखना दिलचस्प होगा कि मिश्रा खुद आशुतोष तिवारी के पक्ष में सक्रिय रूप से चुनाव प्रचार करने मैदान में उतरते हैं, या यह अंदरूनी नाराजगी आगे चलकर भितरघात की कोई नई कहानी लिखती है।
निष्कर्ष
दतिया उपचुनाव अब सिर्फ भाजपा बनाम कांग्रेस की लड़ाई नहीं रह गया, बल्कि यह भाजपा के भीतर के आंतरिक असंतोष और संगठनात्मक फैसलों को लेकर एक बड़ी परीक्षा बन गया है। 30 जुलाई को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि पार्टी आलाकमान का यह जोखिम भरा फैसला सही साबित होता है या नहीं।

