कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट डेटा लीक: भारत के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र, तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट (KKNPP) से जुड़े हजारों कथित संवेदनशील दस्तावेज डार्क वेब पर लीक होने का बड़ा दावा सामने आया है। एक रैनसमवेयर गिरोह, जो खुद को ‘वर्ल्ड लीक्स’ बताता है, ने प्लांट से जुड़ी फाइलों का एक बड़ा संग्रह ऑनलाइन पोस्ट करने का दावा किया है। हालांकि इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
कितना बड़ा है यह कथित लीक
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह लीक कुल 8.58 लाख फाइलों के एक बड़े कैश का हिस्सा है, जिनमें से करीब 19,000 फाइलें सबसे ज्यादा संवेदनशील मानी जा रही हैं। साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं के अनुसार, कुल आकार में यह डेटा करीब 14.3 गीगाबाइट का है और 11 जून से ऑनलाइन उपलब्ध बताया जा रहा है। दावा किया गया दस्तावेजों में शामिल हैं:
- प्लांट की यूनिट-3 और यूनिट-4 के वेंटिलेशन और कूलिंग सिस्टम के कथित ब्लूप्रिंट
- कॉमन कंट्रोल रूम का फ्लोर लेआउट
- सप्लायर्स की पूरी सूची और जानकारी
- निरीक्षण रिपोर्ट, बैठकों के रिकॉर्ड और बीमा से जुड़े दस्तावेज
गौरतलब है कि लीक हुए दस्तावेज 2016 से मध्य-2025 के बीच के बताए जा रहे हैं।
सबसे अहम बात — रिएक्टर का कोर सिस्टम सुरक्षित
राहत की बात यह है कि रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कथित डेटा लीक में परमाणु रिएक्टर के कोर सिस्टम से जुड़ी कोई जानकारी शामिल नहीं है। ये अहम सिस्टम रूस की कंपनी रोसाटॉम द्वारा सप्लाई किए जाते हैं। लीक हुई फाइलें मुख्य रूप से प्लांट के सहायक सिस्टम (सपोर्ट सिस्टम), इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक दस्तावेजों से संबंधित बताई जा रही हैं।
कैसे हुई यह सेंधमारी
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, जो इस प्लांट की यूनिट-3 और यूनिट-4 के बुनियादी ढांचे के निर्माण की जिम्मेदारी संभाल रही है, ने पुष्टि की है कि उसके थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर सेवा प्रदाता ‘योटा’ (Yotta) के सर्वर पर डेटा में “आंशिक सेंध” (पार्शियल ब्रीच) लगी थी। योटा के मुताबिक, 29 मई को उसके सर्वर पर संदिग्ध गतिविधि का पता चला था, जिसे तुरंत रोक दिया गया और एक संभावित रैनसमवेयर हमले को निष्प्रभावी कर दिया गया। हालांकि जून के आखिर में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर को सूचित किया गया कि कुछ बाहरी साइबर अपराधी डेटा चोरी का दावा कर रहे हैं।
जांच में जुटी एजेंसियां
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत की प्रमुख साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In (Indian Computer Emergency Response Team) जांच में जुट गई है। सूत्रों के मुताबिक, न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCIL), जो देश के परमाणु संयंत्रों का संचालन करती है, इस सेंधमारी को लेकर रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ लगातार संपर्क में है। हालांकि परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE), NPCIL, CERT-In और प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक और विस्तृत सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों की राय
न्यूक्लियर थ्रेट इनिशिएटिव (NTI) के वरिष्ठ निदेशक निकोलस रोथ ने आगाह किया है कि अगर ऐसे तकनीकी दस्तावेज वाकई गलत हाथों में पहुंच जाएं, तो इनसे संयंत्र की सहायक प्रणालियों, सप्लाई चेन और सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों का अंदाजा लगाया जा सकता है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक गंभीर जोखिम बन सकता है।
पहले भी हो चुका है साइबर हमला
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब कुडनकुलम प्लांट का नाम किसी साइबर घटना से जुड़ा हो। 2019 में भी इस संयंत्र के प्रशासनिक नेटवर्क पर उत्तर कोरिया से जुड़े एक हैकर समूह के मैलवेयर का पता चला था, हालांकि उस समय NPCIL ने स्पष्ट किया था कि प्लांट के मुख्य (कोर) सिस्टम प्रभावित नहीं हुए थे।
प्लांट का महत्व
कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट भारत के सात परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में सबसे बड़ा है, और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की महत्वाकांक्षी योजना का अहम हिस्सा माना जाता है। इसकी यूनिट-3 और यूनिट-4 के 2027 तक चालू होने की उम्मीद है, जिसके बाद ये दोनों इकाइयां मिलकर करीब 2,000 मेगावाट बिजली उत्पादन करेंगी।
निष्कर्ष
कुडनकुलम प्लांट से जुड़ा यह कथित डेटा लीक भारत में महत्वपूर्ण राष्ट्रीय ढांचे (क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर) की साइबर सुरक्षा को लेकर एक बड़ी चेतावनी है। हालांकि राहत की बात यह है कि रिएक्टर के मुख्य सिस्टम अप्रभावित बताए जा रहे हैं, फिर भी सहायक प्रणालियों से जुड़ी जानकारी लीक होना अपने आप में एक गंभीर सुरक्षा चिंता है। अब सबकी निगाहें CERT-In की जांच रिपोर्ट और सरकार की तरफ से आने वाले आधिकारिक बयान पर टिकी हैं।

