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परिसीमन बिल 2026 — लोकसभा में 850 सीटें, जानें क्या बदलेगा

परिसीमन बिल 2026

परिसीमन बिल 2026 — लोकसभा में 850 सीटें, जानें क्या बदलेगा

भारतीय संसद में इन दिनों एक ऐसे विधेयक को लेकर घमासान मचा हुआ है जो देश की राजनीतिक तस्वीर को पूरी तरह बदल सकता है। परिसीमन बिल 2026 यानी संविधान के 131वें संशोधन विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। यह बिल लोकसभा की सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखता है। इसके साथ ही महिला आरक्षण को भी लागू करने की बात कही जा रही है।

क्या है परिसीमन बिल?

संविधान के अनुसार हर जनगणना के बाद लोकसभा क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण होना चाहिए। 1976 में इंदिरा गांधी सरकार ने 42वें संविधान संशोधन के जरिए इस प्रक्रिया को रोक दिया था। इसके बाद 2001 में 84वें संशोधन से यह रोक 2026 तक बढ़ा दी गई। अब वह समय सीमा समाप्त हो चुकी है और मोदी सरकार इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहती है।

सरकार का पक्ष क्या है?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कहा कि परिसीमन एक संवैधानिक जरूरत है। उनके अनुसार 1971 की जनगणना के आधार पर बनी सीटें आज की आबादी का सही प्रतिनिधित्व नहीं करतीं। उत्तर भारत के राज्यों में जनसंख्या बढ़ी है लेकिन उनकी सीटें नहीं बढ़ीं। सरकार का तर्क है कि इस बिल से लोकतंत्र मजबूत होगा।

विपक्ष क्यों है विरोध में?

विपक्षी दलों का कहना है कि यह बिल दक्षिण भारत के राज्यों के लिए नुकसानदेह है। तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों की सीटें कम हो सकती हैं क्योंकि इन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है। कांग्रेस का आरोप है कि BJP इस बिल के जरिए अपने मजबूत उत्तर भारतीय गढ़ों में सीटें बढ़ाना चाहती है।

मानसून सत्र में फिर लाएगी सरकार

अप्रैल 2026 में लोकसभा में यह बिल पारित नहीं हो सका क्योंकि सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं था। अब खबर है कि 20 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले मानसून सत्र में इसे फिर से लाया जाएगा। इस बार सरकार TMC और DMK के कुछ सांसदों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश में है।

महिला आरक्षण का भी है सवाल

इस बिल के साथ नारी शक्ति वंदन अधिनियम यानी महिला आरक्षण को लागू करने का प्रस्ताव भी जुड़ा है। सरकार चाहती है कि परिसीमन के बाद लोकसभा और विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हों। विपक्ष ने कहा है कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं लेकिन परिसीमन की आड़ में संविधान बदलना स्वीकार नहीं।

देश की राजनीति पर असर

अगर यह बिल पारित हो जाता है तो 2029 के लोकसभा चुनाव पूरी तरह नए नक्शे पर लड़े जाएंगे। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इससे BJP और NDA को फायदा होगा क्योंकि उनके मजबूत राज्यों में सीटें बढ़ेंगी। यह बिल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।

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