राम मंदिर चढ़ावा चोरी: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने चढ़ावा चोरी विवाद के बीच सोमवार को हुई अपनी अहम बैठक में एक बड़ा फैसला लिया है। ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल कुमार मिश्रा, दोनों के इस्तीफे को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। यह बैठक करीब तीन घंटे तक चली और पहली बार राम मंदिर परिसर के भीतर आयोजित की गई, जबकि इससे पहले ट्रस्ट की बैठकें आमतौर पर मणिराम दास छावनी में होती रही थीं।
पूरा मामला क्या है
राम मंदिर परिसर में स्थित मंदिरों से करोड़ों रुपये के चढ़ावे और कीमती जेवरात की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद यह पूरा विवाद शुरू हुआ था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया, जिसने अपनी प्रारंभिक जांच में अनियमितता पाए जाने पर एफआईआर दर्ज कराई। इसी जांच के बीच 26 जून को चंपत राय और अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था, जिसकी पुष्टि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने अगले ही दिन कर दी थी।
बैठक में क्या हुआ
सोमवार की बैठक में ट्रस्ट के 15 में से 9 सदस्य मौजूद थे, जबकि दो सदस्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। चंपत राय और अनिल मिश्रा दोनों इस बैठक में मौजूद नहीं थे। बैठक में मौजूद साधु-संतों ने इस पूरे प्रकरण को लेकर गहरी नाराजगी और चिंता जताई, और कहा कि इस विवाद ने देशभर में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा के दौरान यह भी बताया गया कि ट्रस्ट में हाल की सभी नई नियुक्तियां चंपत राय और अनिल मिश्रा द्वारा ही की गई थीं।
अंततः सर्वसम्मति से दोनों पदाधिकारियों के इस्तीफे को मंजूरी दे दी गई। कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने बैठक के बाद बताया कि जब तक SIT की अंतिम रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक ट्रस्ट की जिम्मेदारी कृष्ण मोहन राम संभालेंगे, जिन्होंने ही शुरुआती जांच के दौरान अनियमितता की एफआईआर दर्ज कराई थी।
जांच में अब तक क्या सामने आया
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में चंपत राय, अनिल मिश्रा समेत कुल 14 लोगों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि यह स्पष्ट रूप से ध्यान देने वाली बात है कि यह अभी सिर्फ प्रारंभिक जांच के निष्कर्ष हैं, और अंतिम जांच रिपोर्ट अभी आना बाकी है, जिसकी उम्मीद 15 जुलाई तक जताई जा रही है। जांच के दौरान मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों की गहन पड़ताल की गई है। अब तक पुलिस इस मामले में 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और उनके पास से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी ट्रस्ट के कर्मचारियों, सुरक्षाकर्मियों और अन्य संबंधित लोगों से भी पूछताछ कर रही है।
SIT ने अपनी सिफारिशों में ट्रस्ट के पुनर्गठन, एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने का सुझाव भी दिया है।
आगे क्या होगा
ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को प्रस्तावित है, जिसमें SIT की अंतिम रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है। इसी बैठक में ट्रस्ट नए न्यासी (ट्रस्टी) की नियुक्ति पर भी फैसला ले सकता है। सूत्रों के अनुसार, इस्तीफे स्वीकार होने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा सिर्फ अपने पदों से ही नहीं, बल्कि ट्रस्ट की आजीवन सदस्यता से भी पूरी तरह बाहर हो सकते हैं, हालांकि इस पर व्यापक और अंतिम फैसला SIT रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा।
ट्रस्ट और संबंधित संगठनों ने साफ किया है कि दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी, लेकिन साथ ही यह भी कहा गया है कि जांच पूरी होने से पहले किसी को भी दोषी नहीं माना जाना चाहिए।
निष्कर्ष
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला अब सिर्फ एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने ट्रस्ट के भीतर बड़े संगठनात्मक बदलावों की नींव भी रख दी है। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को मंजूरी मिलना इस पूरे प्रकरण का एक अहम मोड़ है, लेकिन असली तस्वीर 15 जुलाई को आने वाली SIT की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही पूरी तरह साफ होगी।
(यह खबर उपलब्ध रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की गई है। जांच अभी जारी है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही निकाला जाना चाहिए।)

