मानसून सत्र 2026: 20 जुलाई से शुरू होगा संसद सत्र, 130वां संविधान संशोधन बिल बनेगा सबसे बड़ा मुद्दा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सरकार की सिफारिश पर संसद के मानसून सत्र 2026 को बुलाने की मंजूरी दे दी है। यह सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 4 जुलाई को इसकी जानकारी सार्वजनिक की। चार हफ्तों के इस सत्र में कुल 19 बैठकें होने वाली हैं, जिनमें कई अहम विधेयकों पर चर्चा होगी।

सबसे बड़ा मुद्दा: 130वां संविधान संशोधन बिल

इस सत्र में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला विषय है संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025। इस बिल की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक 17 जुलाई को प्रस्तावित है, जिसमें समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट को मंजूरी दे सकती है।

बिल में मुख्य प्रावधान यह है कि अगर किसी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को किसी गंभीर अपराध (जिसमें पांच साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो) के मामले में गिरफ्तार करके लगातार 30 दिन तक हिरासत में रखा जाता है, तो उसे पद से हटाया जा सकेगा। यह फैसला 31वें दिन खुद-ब-खुद लागू हो जाएगा, अगर संबंधित व्यक्ति खुद इस्तीफा नहीं देता।

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली यह समिति इस विवादित प्रावधान को अपनी रिपोर्ट में बरकरार रख सकती है, हालांकि इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए कुछ अतिरिक्त सुरक्षा उपाय (safeguards) जोड़े जाने की उम्मीद है।

सरकार का पक्ष

बिल का समर्थन करने वालों का तर्क है कि यह प्रावधान सार्वजनिक पदों पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है, ताकि गंभीर आरोपों का सामना कर रहा कोई व्यक्ति लंबे समय तक सत्ता में बना न रहे।

विपक्ष की चिंता

वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि यह प्रावधान महज गिरफ्तारी के आधार पर पद से हटाने की व्यवस्था करता है, जबकि अभी तक दोष सिद्ध (conviction) होने पर ही ऐसी कार्रवाई होती रही है। विपक्ष का आरोप है कि इसका इस्तेमाल जांच एजेंसियों के जरिए राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने और गैर-भाजपा सरकारों को अस्थिर करने के लिए किया जा सकता है। कानूनी विशेषज्ञों के एक वर्ग का यह भी मानना है कि यह प्रावधान संविधान के मूल ढांचे — जैसे कि शक्तियों के पृथक्करण (separation of powers) और संघवाद (federalism) — से जुड़े सवाल खड़े कर सकता है।

आगे क्या-क्या बिल आ सकते हैं

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर 130वां संशोधन बिल सफलतापूर्वक पारित हो जाता है, तो सरकार इसी सत्र में 131वां संविधान संशोधन बिल (लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने और महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण से जुड़ा) और परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) को भी आगे बढ़ाने का प्रयास कर सकती है। हालांकि इसके लिए सरकार को दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी, जो फिलहाल NDA के पास पूरी तरह मौजूद नहीं है।

मानसून सत्र 2026 संसद भवन

पिछले मानसून सत्रों की तुलना में इस बार का सत्र इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि सरकार और विपक्ष दोनों के लिए संख्या बल (numbers game) निर्णायक साबित होगा। पिछले कुछ महीनों में विपक्षी खेमे से कई सांसदों के पाला बदलने की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे NDA गठबंधन दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचने की कोशिश कर रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़ा अभी भी सरकार से दूर है, इसलिए विपक्ष के कुछ सांसदों का रुख इस सत्र में निर्णायक हो सकता है। आम जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें अब 17 जुलाई को आने वाली JPC रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि यह विवादित बिल किस रूप में संसद में पेश किया जाएगा।

निष्कर्ष

मानसून सत्र 2026 भारतीय राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। 130वें संविधान संशोधन बिल पर होने वाली बहस न केवल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनातनी बढ़ा सकती है, बल्कि आने वाले समय में देश की संवैधानिक संरचना पर भी दूरगामी असर डाल सकती है। आने वाले दिनों में JPC रिपोर्ट पेश होने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

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