बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर खुद उतरे मैदान में, BJP से सीधी टक्कर, महागठबंधन का मिल सकता है साथ

प्रशांत किशोर खुद उतरे मैदान में, BJP से सीधी टक्कर, बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने खुद बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव लड़ने का फैसला किया है। पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने इसकी पुष्टि की। बांकीपुर सीट पर 30 जुलाई 2026 को मतदान होना है, और नतीजे 3 अगस्त को घोषित किए जाएंगे।

साल 2025 की हार के बाद बड़ा दांव

नवंबर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था, जिसमें NDA गठबंधन को भारी बहुमत मिला था। उस हार के बाद प्रशांत किशोर के लिए बांकीपुर उपचुनाव एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है। पार्टी के स्थानीय नेताओं का कहना है कि बांकीपुर की जनता की इच्छा पर ही प्रशांत किशोर को खुद चुनाव लड़ने के लिए राजी किया गया।

BJP का गढ़, महागठबंधन का संभावित साथ

बांकीपुर सीट को परंपरागत रूप से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। भाजपा ने इस सीट पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है — सभी 422 बूथों पर सात चरणों में चुनावी अभियान की रणनीति बनाई गई है, जिसमें बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ता बैठकें और जनसंपर्क अभियान शामिल हैं। पार्टी के स्थानीय नेतृत्व का दावा है कि मौजूदा विधायक के कामकाज के आधार पर भाजपा भारी मतों से यह उपचुनाव जीतेगी।

वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस और राजद जैसी महागठबंधन की सहयोगी पार्टियां प्रशांत किशोर को अप्रत्यक्ष समर्थन देने के संकेत दे रही हैं, हालांकि अंतिम फैसला आपसी बातचीत के बाद ही होगा। अगर महागठबंधन का साथ मिलता है, तो यह मुकाबला भाजपा के लिए पहले से ज्यादा कठिन हो सकता है।

प्रशांत किशोर की रणनीति

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, प्रशांत किशोर की कोशिश इस सीट पर जीत दर्ज कर यह संदेश देने की है कि नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव में NDA को मिली जीत का अंतर उतना निर्णायक नहीं था जितना प्रचारित किया गया। एक सीट की जीत भले ही राज्य की सत्ता समीकरण को न बदले, लेकिन यह जन सुराज पार्टी के जमीनी जनाधार को साबित करने के लिए अहम मानी जा रही है।

विरोधियों के तंज भी शुरू

चुनावी मैदान गरमाते ही विरोधी दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। राजद के वरिष्ठ नेताओं ने प्रशांत किशोर पर तंज कसते हुए कहा कि बिहार की जमीनी राजनीति को समझे बिना चुनावी मैदान में उतरना आसान नहीं होगा। वहीं भाजपा नेताओं ने भी अपने संगठन की मजबूती पर भरोसा जताया है।

आगे क्या होगा

नामांकन और प्रचार अभियान जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, बांकीपुर सीट पर सियासी तापमान और बढ़ने की उम्मीद है। सभी दलों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि महागठबंधन आधिकारिक रूप से किसे समर्थन देता है, और क्या प्रशांत किशोर अपने राजनीतिक भविष्य के लिए यह अहम मुकाबला जीत पाते हैं।

निष्कर्ष

बांकीपुर उपचुनाव अब सिर्फ एक स्थानीय मुकाबला नहीं रह गया, बल्कि यह प्रशांत किशोर और जन सुराज पार्टी के राजनीतिक भविष्य के लिए एक निर्णायक टेस्ट बन गया है। 30 जुलाई को होने वाला मतदान और 3 अगस्त को आने वाला नतीजा बिहार की आगामी राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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