रेलवे टिकट बुकिंग सिस्टम भारतीय रेलवे का 40 साल पुराना सिस्टम बदलेगा, अब 1 मिनट में बुक होंगे 1.25 लाख टिकट

रेलवे टिकट बुकिंग सिस्टम भारतीय रेलवे अपने इतिहास के सबसे बड़े तकनीकी बदलाव की ओर बढ़ रहा है। साल 1986 से चला आ रहा करीब चार दशक पुराना पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) अब पूरी तरह बदलने जा रहा है। अगस्त 2026 से यह नया, अत्याधुनिक और AI-आधारित सिस्टम चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिसे रेलवे की टिकटिंग व्यवस्था के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आधुनिकीकरण माना जा रहा है।

कितना तेज होगा नया सिस्टम

मौजूदा समय में रेलवे का सिस्टम एक मिनट में करीब 25,000 टिकट ही प्रोसेस कर पाता है। नए हाई-कैपेसिटी सिस्टम के लागू होने के बाद यह क्षमता बढ़कर 1.25 लाख से 1.5 लाख टिकट प्रति मिनट तक पहुंच जाएगी — यानी मौजूदा क्षमता से करीब पांच गुना ज्यादा। सीट उपलब्धता चेक करने की क्षमता में भी जबरदस्त इजाफा होगा — पहले यह सिस्टम एक मिनट में 4 लाख अनुरोध (रिक्वेस्ट) संभाल पाता था, जो अब बढ़कर 40 लाख प्रति मिनट तक पहुंच जाएगा।

इस बदलाव की जानकारी Centre for Railway Information Systems (CRIS) ने अपने 41वें स्थापना दिवस के मौके पर दी। CRIS के प्रबंध निदेशक जीवीएल सत्य कुमार ने कहा कि रेलवे का मकसद सिर्फ नई तकनीक अपनाना नहीं, बल्कि उसका सीधा फायदा आम यात्रियों तक पहुंचाना है।

तत्काल टिकट बुकिंग की परेशानी होगी कम

त्योहारों, छुट्टियों और खासतौर पर तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान लाखों यात्री एक साथ वेबसाइट और ऐप पर लॉगिन करते हैं, जिससे सर्वर पर भारी दबाव पड़ता है और अक्सर वेबसाइट धीमी हो जाती है या हैंग हो जाती है। नए क्लाउड-आधारित सिस्टम से यह समस्या काफी हद तक कम होने की उम्मीद है, क्योंकि डेटा अब एक ही जगह नहीं, बल्कि कई सर्वरों पर सुरक्षित रहेगा, जिससे सिस्टम ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद बनेगा।

AI बताएगा वेटिंग टिकट कन्फर्म होगा या नहीं

नए सिस्टम की सबसे उपयोगी खासियत है इसका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित प्रेडिक्शन टूल, जो यह अनुमान लगाएगा कि किसी वेटिंग लिस्ट टिकट के कन्फर्म होने की कितनी संभावना है। रेलवे के मुताबिक, पहले इस भविष्यवाणी की सटीकता करीब 53% थी, जो अब सुधर कर 94% तक पहुंच गई है। इससे यात्री अपनी यात्रा को पहले से बेहतर तरीके से प्लान कर सकेंगे, कि उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था करनी है या नहीं।

RailOne ऐप बनेगा नया चेहरा

यह पूरा नया सिस्टम रेलवे के RailOne ऐप के साथ पूरी तरह जुड़ेगा, जो जुलाई 2025 में लॉन्च हुआ था और अब तक 3.5 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड हासिल कर चुका है। वर्तमान में रोजाना औसतन करीब 9.29 लाख टिकट इसी ऐप के जरिए बुक हो रहे हैं। नए अपग्रेड के बाद ऐप में और भी सुविधाएं जुड़ेंगी:

  • फेयर कैलेंडर — अलग-अलग तारीखों के किराए की जानकारी पहले से मिलेगी
  • सीट चयन — एयरलाइन बुकिंग की तरह यात्री अपनी पसंद की सीट चुन सकेंगे
  • ग्रुप बुकिंग — परिवार या ग्रुप एक साथ आसानी से सीट बुक कर पाएंगे
  • बहुभाषी सपोर्ट — सिस्टम कई भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगा
  • दिव्यांग और मरीज यात्रियों के लिए विशेष सुविधाएं भी जोड़ी जाएंगी

रेल मंत्री की समीक्षा

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में रेल भवन में इस पूरे प्रोजेक्ट की समीक्षा की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि नई व्यवस्था लागू करते समय यात्रियों को न्यूनतम परेशानी हो, इस बात का पूरा ध्यान रखा जाए। नया सिस्टम स्टेप-बाय-स्टेप तरीके से लागू किया जाएगा, और ट्रेनों को धीरे-धीरे नए प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट किया जाएगा, ताकि अचानक कोई तकनीकी दिक्कत न आए।

क्यों जरूरी था यह बदलाव

जब मौजूदा PRS सिस्टम शुरू हुआ था, उस दौर में ज्यादातर टिकट आरक्षण काउंटरों से बुक होते थे और इंटरनेट का दायरा बेहद सीमित था। लेकिन बीते चार दशकों में तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है — आज करीब 88% टिकट ऑनलाइन बुक हो रहे हैं। बढ़ती डिजिटल मांग के आगे पुराना सिस्टम बार-बार दबाव में आ जाता था, खासकर पीक सीजन के दौरान।

निष्कर्ष

भारतीय रेलवे का यह अपग्रेड सिर्फ तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि करोड़ों यात्रियों के रोजमर्रा के अनुभव को बदलने वाला कदम है। तेज बुकिंग स्पीड, ज्यादा सटीक AI भविष्यवाणी और बेहतर यूजर एक्सपीरियंस के साथ, अगस्त 2026 से शुरू होने वाला यह बदलाव भारतीय रेलवे को एक आधुनिक, डिजिटल युग की ओर एक बड़ा कदम आगे ले जाएगा।

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