अमेरिका ईरान युद्ध: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले महीने हुआ संघर्षविराम (सीजफायर) एक बार फिर टूट चुका है, और मध्य पूर्व में तनाव नए सिरे से चरम पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद पुष्टि की है कि सीजफायर अब खत्म हो चुका है, जबकि दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रखने पर सहमति भी बनी है।
कैसे बिगड़े हालात
पिछले महीने ही फ्रांस में एक बड़े समारोह के दौरान ट्रंप ने अमेरिका-ईरान युद्ध को खत्म करने वाले समझौते पर हस्ताक्षर करते हुए इसे ईरान का “बिना शर्त आत्मसमर्पण” बताया था। लेकिन हाल के दिनों में ईरान पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास कई व्यापारिक जहाजों पर हमला करने का आरोप लगा, जिसे अमेरिका ने समझौते का उल्लंघन बताया। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान पर फिर से हमले शुरू कर दिए और तेल पर लगे प्रतिबंध भी दोबारा बहाल कर दिए।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, बीते हफ्ते ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए गए। जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमला करने का दावा किया।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना सबसे बड़ा मुद्दा
दुनिया के सबसे अहम तेल पारगमन मार्गों में शुमार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इस पूरे विवाद का केंद्र बिंदु बन गया है। ईरान इस जलमार्ग के एक हिस्से पर अपना नियंत्रण होने का दावा करता रहा है, जबकि हालिया हमलों के बाद यहां से जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वे ईरान से जल्द एक सार्वजनिक बयान की उम्मीद कर रहे हैं, जिसमें यह भरोसा दिलाया जाए कि जलमार्ग खुला है और वाणिज्यिक जहाजों पर हमला नहीं किया जाएगा।
ट्रंप की चेतावनी
राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार रात एक सोशल मीडिया पोस्ट में कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान ने उनकी हत्या की कोशिश की, तो अमेरिका के मिसाइल पूरी तरह “तैयार” हैं। यह चेतावनी इजरायली खुफिया एजेंसियों द्वारा साझा की गई उस जानकारी के बाद आई, जिसमें दावा किया गया था कि ईरान की तरफ से ट्रंप की हत्या की साजिश रची जा रही है। हालांकि अमेरिकी सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी ठोस और नई साजिश के प्रमाण नहीं मिले हैं, बल्कि यह सामान्य चर्चाओं का हिस्सा है।
ईरान के नए सुप्रीम लीडर का पहला बयान
युद्ध की शुरुआत में हुए एक हमले में ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई थी, जिसके बाद उनके बेटे मोज्तबा खामेनेई ने यह जिम्मेदारी संभाली। अपने पिता की अंत्येष्टि के बाद जारी पहले बयान में मोज्तबा ने कहा कि बदला लेना उनकी कौम की मांग है, और यह जरूर पूरा किया जाएगा। गौरतलब है कि युद्ध शुरू होने के बाद से ही नए सुप्रीम लीडर सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं और सिर्फ लिखित संदेशों के जरिए ही संपर्क में हैं। माना जाता है कि फरवरी में हुए उसी हमले में वे भी घायल हुए थे, जिसमें उनके माता-पिता की जान गई थी।
कूटनीतिक कोशिशें जारी
तनाव के बावजूद बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। कतर और पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिर से शुरू कराने की कोशिशों में जुटे हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ओमान पहुंचे हैं, जहां वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चर्चा कर रहे हैं। ईरान के मुख्य वार्ताकार ने कहा है कि अमेरिका पर उन्हें कोई भरोसा नहीं है, लेकिन युद्ध खत्म करना सभी देशों की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह संघर्ष ईरान के आत्मसमर्पण के साथ कभी खत्म नहीं होगा।
वैश्विक असर
इस बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी साफ दिख रहा है, ताजा हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा गया। अमेरिका ने ईरान से जुड़े कुछ और वित्तीय नेटवर्क पर भी नए प्रतिबंध लगाए हैं। क्षेत्रीय ताकतों में शामिल खाड़ी देश भी इस अस्थिरता को लेकर चिंतित हैं, कतर के विदेश मंत्री ने ईरान, सऊदी अरब और यूएई के अपने समकक्षों से बातचीत करते हुए संवाद और कूटनीति पर जोर दिया है।
भारत के लिए क्यों है यह अहम
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर भारत का एक बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात होता है, इसलिए इस जलमार्ग में जारी अस्थिरता का सीधा असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। इसके अलावा खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में रह रहे भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
निष्कर्ष
अमेरिका-ईरान संघर्ष एक बार फिर एक नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक बातचीत दोनों एक साथ चल रही हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि क्या कतर और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थों की कोशिशें रंग लाती हैं, या यह टकराव और बड़ा रूप लेता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति और वैश्विक तेल बाजार पर इसका असर आने वाले हफ्तों में सबसे अहम मुद्दा बना रहेगा।