राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर सपा-कांग्रेस के हमलों से घिरे CM योगी का पलटवार, बोले- ‘वक्फ की लूट पर चुप क्यों?

योगी आदित्यनाथ वक्फ बयान:

अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर विपक्षी दलों समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के लगातार हमलों के बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते दिनों प्रतापगढ़ और चित्रकूट की जनसभाओं में विपक्ष पर सीधा और तीखा पलटवार किया है। मुख्यमंत्री ने चढ़ावा चोरी के मुद्दे को वक्फ बोर्ड से जुड़ी भूमि के मामलों से जोड़ते हुए विपक्ष से जवाबी सवाल पूछे।

क्या कहा मुख्यमंत्री ने

प्रतापगढ़ में 384 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जो दल राम मंदिर की एक कथित घटना को लेकर हिंदू आस्था पर सवाल उठाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्होंने वक्फ के नाम पर हुई हजारों हेक्टेयर भूमि से जुड़ी अनियमितताओं पर कभी आवाज नहीं उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह जमीनें गरीब और कमजोर तबकों की थीं, जिन्हें वक्फ के नाम पर हड़पा गया।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर जाति और आस्था के मुद्दों के जरिए समाज को बांटने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया, और कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों ने अतीत में अयोध्या आंदोलन का विरोध किया था, इसलिए अब उन्हें हिंदू आस्था की दुहाई देने का नैतिक अधिकार नहीं है।

SIT जांच पर मुख्यमंत्री की सफाई

चित्रकूट में एक अन्य सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि मंदिर परिसर में दान की गिनती से जुड़े करीब 150 लोगों की जांच की गई, जिनमें से सिर्फ आठ के खिलाफ प्रमाण मिले हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की गलतियों की वजह से पूरे मंदिर ट्रस्ट को कठघरे में खड़ा करना उचित नहीं है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि ट्रस्ट ने खुद ही सरकार को इस अनियमितता की जानकारी दी थी और उच्च-स्तरीय SIT जांच का अनुरोध किया था, जिसके आधार पर ही अब तक की कार्रवाई हो रही है।

विपक्ष का पलटवार

समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने मुख्यमंत्री के इन बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री चढ़ावा चोरी जैसे असली मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए वक्फ का मुद्दा उठा रहे हैं। प्रसाद ने कहा कि पेपर लीक, महंगाई और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों जैसे जनहित के मुद्दों पर सरकार खामोश है, इसलिए पुराने और भावनात्मक विवादों को फिर से हवा दी जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की बढ़ती लोकप्रियता को लेकर सरकार असहज है।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के “सनातन ही समाजवाद है” वाले पुराने बयान का हवाला देते हुए अवधेश प्रसाद ने कहा कि उनकी पार्टी की विचारधारा और व्यवहार एक-दूसरे के अनुरूप है।

दोनों तरफ के तर्क

भाजपा और मुख्यमंत्री योगी का पक्ष: राम मंदिर से जुड़ा मामला पहले ही SIT जांच के दायरे में है और दोषियों पर कार्रवाई हो रही है। विपक्ष एक इक्का-दुक्का घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पूरी अयोध्या और हिंदू आस्था को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है, जबकि वक्फ भूमि से जुड़े बड़े मुद्दों पर उसने कभी सवाल नहीं उठाए।

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का पक्ष: चढ़ावा चोरी एक गंभीर मामला है, जिस पर सरकार और मंदिर ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। वक्फ का मुद्दा उठाना सिर्फ असली सवालों से ध्यान भटकाने और आगामी चुनावों को देखते हुए ध्रुवीकरण की एक रणनीति है।

निष्कर्ष

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला अब सिर्फ एक प्रशासनिक-कानूनी जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर प्रदेश की सियासत में वक्फ भूमि जैसे संवेदनशील मुद्दे से जुड़कर एक बड़ी राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद यह तय होगा कि जांच का दायरा ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों तक जाता है या नहीं, लेकिन तब तक यह मुद्दा सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी का केंद्र बना रहेगा।

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