FIFA World Cup 2026 के तीसरे स्थान के मुकाबले में शनिवार को मियामी के हार्ड रॉक स्टेडियम में फुटबॉल फैंस को इस पूरे टूर्नामेंट के सबसे रोमांचक मैचों में से एक देखने को मिला। इंग्लैंड ने फ्रांस को एक जबरदस्त गोल-फेस्ट में 6-4 से हराकर टूर्नामेंट का कांस्य पदक (तीसरा स्थान) अपने नाम कर लिया।
कैसे बना मैच का रोमांच
दोनों टीमें सेमीफाइनल में मिली दिल तोड़ने वाली हार के बाद इस मुकाबले में उतरी थीं — फ्रांस को स्पेन ने 2-0 से हराया था, जबकि इंग्लैंड को गत चैंपियन अर्जेंटीना ने आखिरी लम्हों में 2-1 से पछाड़ा था। इंग्लैंड ने अपने दो सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों हैरी केन और जूड बेलिंघम को शुरुआती एकादश में बेंच पर बिठाया था, फिर भी टीम ने शुरुआत से ही दबदबा बनाया।
डेक्लन राइस ने मैच के तीसरे मिनट में ही शानदार लॉन्ग-रेंज गोल दागकर इंग्लैंड को बढ़त दिला दी, और इसके तुरंत बाद कॉर्नर पर कॉन्सा के हेडर पर भी असिस्ट किया। इसके बाद बुकायो साका ने पहले हाफ में दो गोल दागकर इंग्लैंड को हाफ-टाइम तक 4-0 की शानदार बढ़त दिला दी।
फ्रांस की जोरदार वापसी
दूसरे हाफ की शुरुआत में फ्रांस के कोच ने एक साथ चार खिलाड़ियों को बदला, जिसमें रीइनिंग बैलोन डी’ओर विजेता ओस्मान डेम्बेले भी शामिल थे। इसका असर तुरंत दिखा — दूसरे हाफ शुरू होने के महज तीन मिनट बाद ही किलियन एमबाप्पे ने गोल दागकर फ्रांस की वापसी की शुरुआत की। यह टूर्नामेंट में एमबाप्पे का 9वां गोल था, जिससे उन्होंने गोल्डन बूट (टॉप स्कोरर) की रेस में अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी को पीछे छोड़ दिया।
इसके बाद डेम्बेले और ब्रैडली बारकोला ने भी गोल दागकर अंतर को 4-3 तक ला दिया, और स्टेडियम में सन्नाटा छा गया — जो एक तरफा मुकाबला लग रहा था, वह अब बेहद रोमांचक हो चुका था।
साका की हैट्रिक और बेलिंघम का जादू
फ्रांस की वापसी से दबाव में आए बिना, इंग्लैंड को एक पेनल्टी मिली, जिसे बुकायो साका ने बड़ी सहजता से गोल में बदलकर अपनी हैट्रिक पूरी की — यह देखते हुए और भी हैरान करने वाला रहा, क्योंकि साका सेमीफाइनल में अर्जेंटीना के खिलाफ एक मिनट भी नहीं खेले थे। फ्रांस ने फिर भी हार नहीं मानी, लेकिन इंग्लैंड ने तुरंत जवाब दिया — जूड बेलिंघम ने टूर्नामेंट का अपना सातवां गोल दागकर मुकाबले पर मुहर लगा दी। अंतिम स्कोर रहा इंग्लैंड 6, फ्रांस 4।
टूर्नामेंट का निचोड़
इस जीत के साथ इंग्लैंड ने अपना 2026 वर्ल्ड कप अभियान तीसरे स्थान के साथ समाप्त किया, जबकि फ्रांस को चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा। टूर्नामेंट का फाइनल अब अर्जेंटीना और स्पेन के बीच खेला जाएगा। मुकाबले से पहले फ्रांस के कोच दिदिएर देशां ने स्वीकार किया था कि उनकी टीम इस “प्लेसमेंट मैच” के लिए मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार नहीं थी, फिर भी उन्होंने एमबाप्पे, माइकल ओलिस और माइक मैनन जैसे बड़े खिलाड़ियों को मैदान में उतारा था।
निष्कर्ष
भले ही यह मुकाबला सिर्फ तीसरे स्थान के लिए था, लेकिन 10 गोलों से सजे इस थ्रिलर ने साबित कर दिया कि दोनों टीमों ने टूर्नामेंट को हल्के में नहीं लिया। बुकायो साका की हैट्रिक और किलियन एमबाप्पे का गोल्डन बूट रेस में आगे निकलना, दोनों ही इस मैच की सबसे बड़ी कहानियां रहीं। अब सबकी निगाहें रविवार को होने वाले फाइनल पर टिकी हैं, जहां अर्जेंटीना अपने खिताब का बचाव करते हुए स्पेन से भिड़ेगी।